"मन का नियंत्रण: जीवन का सच्चा राजयोग"

 बस से कॉलेज जा रही थी। उस समय मेरा ऊषा मार्टिन में नौकरी लग गया था। बस में बैठे-बैठे अचानक मेरे मन में रामानंद सागर के श्रीकृष्ण कार्यक्रम का एक गीता वाले एपिसोड का दृश्य कौंधा। वह घोड़े के बेकाबू होकर भड़कने वाला दृश्य था। यह अचानक आया; मैं उस बारे में सोच भी नहीं रही थी। लेकिन जब वह दिमाग में आया, तो फिर विचारों की एक श्रृंखला शुरू हो गई।

वह चंचल और बेकाबू घोड़ा मन की चंचलता का प्रतीक लगा। जैसे एक बेकाबू घोड़े को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल होता है और इसके लिए काफी मेहनत लगती है, वैसे ही अपने मन को काबू में लाना भी बेहद कठिन होता है। यह बात उस वक्त मुझे गहराई से समझ में आई। लेकिन तभी मन में एक और सवाल उठा—अगर घोड़ा काबू में आ जाए, तो उसे जिस दिशा में ले जाना चाहें, ले जाया जा सकता है। इसी तरह, अगर मन को काबू में कर लिया जाए, तो उसे सही दिशा में कैसे ले जाएं? यह सवाल उस समय समझ में नहीं आया, और मैंने उस पर सोचना छोड़ दिया।

इसके बाद कभी-कभी उस पर मेरे विचार चलते रहे। धीरे-धीरे मुझे यह बात समझ में आने लगी कि "मन जीते, जग जीता"। जिसका मन उसके काबू में हो, उसकी पूरी ज़िंदगी नियंत्रण में रहती है। वह अपनी ज़िंदगी का राजा होता है।

ऐसे ही कई अलग-अलग अनुभव मुझे हुए, और इन्हीं अनुभवों से मुझे यह समझ में आया कि बाबा हमारी सूक्ष्म मशीनी प्रणाली के माध्यम से, यानी हमारी कल्पनाओं, विचारों और दृष्टांतों के जरिये हमें सिखाते हैं। बाबा का यह शिक्षण गहराई से हमारे भीतर उतरता है और हमें जीवन जीने की कला सिखाता है।

Comments

Popular posts from this blog

Book Summary: The Power of Now by Eckhart Tolle

Where Science Ends, Spiritualism Begins

an interpreation from ramakrishna